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वायदा – एक बार ही मिलना था

– 1 –

वो वहाँ सोफे पर, एक कोने में बैठा हुआ था।
एकदम शांत! उसका चेहरा एकचित और भावविहीन था और उसका शरीर एकदम स्थिर।
उसकी भावभंगिमा को देखकर ऐसा प्रतीत होता था मानो कोई साधु अपनी तपस्या में पूर्णतः तल्लीन हो,उसके अगल-बगल में क्या कुछ घट रहा है उससे उसे कोई वास्ता न था।
उसकी नज़रें कॉरिडोर में टँगी उस घड़ी पर थी, जो उम्र में शायद उससे भी बड़ी रही होगी, या यों कहें कि बाबा आदम के ज़माने की।
.
घड़ी ने 11:45 बजाये और उसने एक गहरी सांस भारी और बुदबुदाया – ” huh.. बस 15मि और”
.
अब उसने अपनी नज़र फ़र्श पर टिका ली थीं, फ़र्श पर उकरे हुए पैटर्न्स में वो कहीं खो सा जाने को हुआ था कि एक मधुर आवाज़ ने उसका ध्यान खींचना चाहा-
“आप भी प्रेक्टिकल के लिए आये हैं”
.
उसने नज़रे फ़र्श पर ही टिकाये रखीं और न चाहते हुए भी अपना सिर हाँ में हिलाया।
कुछ देर की शांति के बाद फिर वही आवाज़ उसके कानों में पड़ी, वो लड़की ही थी, हाँ लड़की ही थी।

– 2 –

कुछ देर की शांति के बाद फिर वही आवाज़ उसके कानों में पड़ी, वो लड़की ही थी, हाँ लड़की ही थी।

“आप किस क्लास में है?”
“1MSc-CS”
“अरे वाह!मैं भी 1MSc में हूँ, पर आपको कभी देखा नही क्लास में, आज आपका पहला दिन है क्या?”

लगता था लड़की भी उस शांत वातावरण से ऊब गयी थी, तभी तो उसने एक और सवाल अपनी बात में जोड़ लिया।

“नहीं चौथा दिन, पर कभी क्लास नही ली”
“हाँ, वई तो आप कभी नही दिखे”

उसने फिरसे हाँ में सिर हिलाया और घड़ी को देखा, अब भी 12बजने में 5मि थे।वो जितना शांत रहना चाहता था ये लड़की उतनी ही ज्यादा बातें किये जा रही थी। उसने सोचा चलो थोड़ा बाहर टहल आया जाए और वो सोफे से उठ गया।
और जैसे ही चलने को हुआ फिर लड़की ने सवाल किया-
“आप क्लास जा रहे क्या?”
उसने न में सिर हिलाया।
“तो”
“बस यूहीं,सोचे कि बाहर टहल लिया जाए”
वो गेट तक पहुँचा ही था कि फॉर्मेलिटीवश उसने पूछ लिया
“आप क्यूँ बैठे हैं, आप चलिए तबतक”

वो नही चाहता था कि उसे पता चले कि वो बाहर, उस लड़की की ही बातों से पिंड छुड़ाने के लिए जा रहा था।

“नही वो न मैं एक फ्रेंड है उसकी wait कर रही थी।”
“ओह! ठीक है फिर”

उसने बात अनसुनी की और बाहर कैंपस में निकल गया

– 3 –

उसने प्यूरीफायर से पानी लिया और पीने लगा।साथ ही साथ वो ये भी सोच रहा था कि आखिर कोई इतनी बकबक कैसे कर सकता है, और वो भी उसके साथ जिससे आप पहली मर्तबा मिले हों।
इतने में Bell बज गई। 12 बज चुके थे।घड़ी में भी और उसके दिमाग के भी।

उसने गिलास रखी और तुरंत क्लास की तरफ चल पड़ा।जैसे ही वो दूसरी मंजिल पर पहुँचा सहसा शांत हो गया (पहले जैसे)। अब उसके चेहरे पर चिंता के कोई भाव नही थे।वो आराम-आराम से चलने लगा।उसने सोचा कि BSc के 3वर्षों में वो भला कब समय से प्रेक्टिकल देने गया था और टीचर ही कब समय से आये थे, तो इतना घबराना क्यों?आराम से चलते हैं।

अभी वो इतना सोच ही रहा था कि उसके कानों में फिर वो ही आवाज़ पड़ी

“इतना धीमे-धीमे चलोगे न तो प्रेक्टिकल खत्म होने के बाद पहुँचोगे, जल्दी चलो”

उसने मुड़कर देखा ये वो ही लड़की थी, “कॉरिडोर वाली”।अबकी बार उसने उसे गौर से निहारा।
उसने सफेद टॉप पहना हुआ था जिस पर GUCCI लिखा हुआ था और उसके साथ गहरे काले रंग की डेनिम।उसने उसका चेहरा देखा जो कि बेहद आकर्षक था।

उसके मुंह से सहसा ही निकल पड़ा

“वैसे आपका नाम क्या है, वैसे?”
“नाम-वाम तो बाद में भी पता चलता रहेगा न, फिलहाल प्रेक्टिकल है, उसपे ध्यान देते हैं।”
लड़की ने कहना जारी रखा
“और हाँ, “वैसे” दो बार यूज़ नही होता वो भी एकसाथ तो बिकुल नही”
और हल्का सा मुस्कुराई।

वो आवाक् से रह गया, अभी वो कुछ कह पाता, इतने में वो क्लास में जा चुकी थी।
और अब उसकी बारी थी,वो क्लास में घुसा।उसने चारो तरफ नज़रें दौड़ाई, इससे पहले कि वो लड़की उसे दिख पाती, पीछे की डेस्क से दो हाथ हवा में लहराते हुए दिखाई दिए।
ये उसके दोस्त थे।

– 4 –

उसका फोन बजा, ये शिव था।उसने फ़ोन उठाया।
“हाँ भाई”
“भाई जल्दी से कॉलेज कैंटीन आजा”
“कहे का हो गया”
“अरे तेरा भाई पार्टी दे रहा, जल्दी आ”
इतना कहकर उसने फोन रख दिया।
थोड़े देर बाद उसका फोन फिर बजा, इस बार भी शिव ही था।
“पहले ये बताओ कि लाला की जेब से इतना खर्चा क्यों हो रहा, तभी आएंगे हम”
उसने फोन उठाते ही कहा।उसे मालूम था कि शिव दोबारा से जरूर करेगा फोन कन्फर्मेशन के लिए।
“अरे, तेरे भाई ने टॉप मारा है, फर्स्ट सेम में”-शिव ने बताया।
“सच मे रिजल्ट आ गईल का हो?, भौकाल तो नही मार रहे न”
“सच मे आ गया भाई कल रात को, तुम आओ जल्दी से अब। तुम्हारे बिना हमरा जतरा नही बनने वाला”
“ठीक है आ रहे”
इतना कहकर उसने फोन रखा और तैयार होने लगा।और तैयार होकर कॉलेज निकल गया।

– 5 –

कॉलेज पहुचते ही उसने कैंटीन का रुख किया।वहां पहुचते ही वो कंफ्यूज हो गया।वहां शिव तो दिखा नही, बल्कि 10-15 दूसरे लोग खड़े थे।उसे लगा कि शिव ने उसे बेवकूफ बना दिया लगता है वो गुस्से में पलटा, वैसे ही उसे किसीने पुकारा।
“Hey, haiyaaar”
ये आस्तिक था।जिसे ब्रिटिश लहजे में बात करने का शौक था।वो पलटा तो आस्तिक ने पास आने का इशारा किया।वो पास गया तो शिव उस भीड़ के बीच मे बैठा था।उसे देखते ही शिव लपक कर खड़ा हुआ और उसे एक कोने में ले गया।आस्तिक भी उनके पीछे हो लिया।और शिव ने कहा
“भाई फज़ीहत हो गयी”
“काहेकि?और ये भीड़”
“इहे तो बात है”उसने कहना जारी रखा “प्लान तो 5-6 लोगो का था पर ये रिया है न उसने सभी को invite कर लिया, वो लड़की है न लाल कुर्ती में उसने टॉप मारा है फिर भी बिल हमारे नाम क् फट रहा आज”
और उसने उस ओर इशारा किया।
ये वही लड़की थी कॉरिडोर वाली।
इतने में लड़की ने पूछा
“भई इधर तो आओ, पार्टी देने वाले का आर्डर तो लिखवा दे। इतना तो कर ही सकते है हम लोग “
इतना कहकर वो हसने लगी, साथ मे बाकी लोग भी हसने लगे।उसने उसे फिर से निहारा, वो हसते हुए और भी खूबसूरत लग रही थी।इतने में शिव ने फिर दोहराया
“भाई बचा ले”
उसने कहा
“भई शिव इधर मजा नही आने वाला चल कॉफी हाउस चले हर बार की तरह”
“ठीक है भाई, sorry guys भाई का मन नही है तो पार्टी फिर किसी और दिन ठीक के”
इतने में रिया ने कहा
“शिव पार्टी बिल के डर से तो नही न कैंसल”
“नही यार भाई का मन नही है न इसलिए”
“हमारे आ जाने से तो नहीं बिगड़ गया न आपका मन”
इस बार लड़की ने उससे पूछा।
“नही जी, बस हमे भीड़ नही पसन्द”
इतना कहकर वो वहां से निकल गया।और उसके पीछे-पीछे शिव और आस्तिक भी।
“स्ट्रेंज”लड़की इतना ही कहकर रह गयी।

Author:

M. Sc in CS, political & defence analyst, Part Time Skatch artist, Writter & Poet also,

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